Friday, 11 April 2014

आतताई के आने की संभावना से बनारस खत्म हो रहा हैं

बनारस में आतताई के आने की खबर से
हर माँ की आँखे नम सी हो गई हैं
बच्चो को कलेजे में समेटकर रात भर करवटे बदल रही हैं
आतताई के आने की संभावना से
साँप / बिच्छु / छंछुन्दर अपने बिलो से बाहर आना बंद कर चुके हैं
पंक्षियों ने पेड़ो पर घोसला बनाना छोड़ दिया हैं
हिंदू लड़कियां बंद कर दी हैं
मुसलमान लड़को को खत लिखना
और हिन्दू लड़के भी नहीं लिख रहे हैं
मुसलमान लड़कियों को खत………
आतताई के आने की खबर से बिगड़ गया हैं
बनारस का हाथी जैसा मस्त चाल
बनारस जलने की और ख़त्म होने की उम्मीद में मरघट पर सियारो की तरह ऊंघ रहा हैं भर
अब - तक लोग यही जानते थे
देवताओं की अवतार होता हैं
लेकिन हमारी सभ्यता में यह पहली बार होने जा रहा हैं
की एक आतताई आकर लोगो की नींदों में जगाते हुए मार रहा हैं........
उसके आने मात्र की सूचना से
बनारस की वैश्याएँ अपना कारोबार समेटकर दूर किसी और शहर की और कुच कर रही हैं
सब्जी वाले / आटों वाले / चाय वाले
सब भागकर कहीं और चले गए हैं
आतताई के आने से लोगो को यही लग रहा हैं
बनारस के लोगो के सीने पर चढ़कर जब तक होली नहीं खेली जाएगी
तब -तक आतताई लाल किले पर नहीं चढ़ पायेगा
बनारस भूल चूका हैं की कभी यहाँ कबीर भी हुआ करते थे
बनारस जानता हैं की आतताई को अपने आगे किसी की बात नहीं जमती
हमें अपने कंधे मजबूत करना चाहिए
क्योकि इस बार हम अपने कंधे पर आदमी का शव लेकर नहीं
घूमेंगे बल्कि शिव का शव हमारे कंधो पर होगा
क्योकि बनारस का हर आदमी या तो शिव हैं या अल्लाह ।

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